भोपाल, 11 जून।
प्रदेश सरकार के डिजिटल पंजीयन प्लेटफॉर्म संपदा 2.0 पर प्रतिदिन 400 से 500 पंजीयन होने के दावों को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिल रहे हैं कि कुल पंजीयनों में बड़ी संख्या ऐसे दस्तावेजों की है, जिनका सीधा संबंध जमीन और मकान की खरीद-बिक्री से नहीं है। ऐसे में कुल आंकड़ों और वास्तविक प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के बीच अंतर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक प्रतिदिन दर्ज होने वाले कुल पंजीयनों में केवल लगभग 25 प्रतिशत मामले ही ऐसे होते हैं, जिनमें एक लाख रुपये या उससे अधिक की स्टांप ड्यूटी प्राप्त होती है। जानकारों का मानना है कि इसी श्रेणी को वास्तविक संपत्ति खरीद-बिक्री और अधिक राजस्व देने वाले पंजीयनों का संकेतक माना जाता है।
पंजीयन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो 27 मई को कुल 495 पंजीयन दर्ज हुए, जिनमें 135 मामले उच्च राजस्व श्रेणी के थे। इसी प्रकार 26 मई को 474 पंजीयनों में 114 और 25 मई को 963 पंजीयनों में 188 मामले ही ऐसे रहे, जिनका संबंध उच्च राजस्व वाली संपत्ति रजिस्ट्रियों से था।
इन आंकड़ों के आधार पर यह सवाल उठ रहा है कि कुल पंजीयनों की संख्या को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े वास्तविक सौदों का अनुपात अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कुल संख्या से बाजार की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन है।
जानकार बताते हैं कि संपदा 2.0 के तहत अब जमीन और मकान की रजिस्ट्रियों के अलावा कई अन्य प्रकार के दस्तावेजों का भी ऑनलाइन पंजीयन किया जा रहा है। इनमें बिजली कनेक्शन से जुड़े शपथपत्र, लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार अनुबंध और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज शामिल हैं। इनकी वजह से पंजीयनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन राजस्व योगदान अपेक्षाकृत सीमित रहता है।
दूसरी ओर, पोर्टल को लागू हुए लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उपयोगकर्ताओं की तकनीकी समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी हैं। दस्तावेज अपलोड होने में परेशानी, ओटीपी सत्यापन में देरी, ऑनलाइन वेरिफिकेशन और जियो-टैगिंग से जुड़ी दिक्कतों के कारण लोगों को कई बार रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि सर्वर की धीमी गति और तकनीकी बाधाओं के चलते कई बार निर्धारित समय पर पंजीयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। इससे आम नागरिकों को अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं।
इस संबंध में वरिष्ठ जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा का कहना है कि सभी प्रकार के पंजीयन वर्तमान में संपदा 2.0 के माध्यम से किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर लगातार नजर रखी जा रही है और उनके समाधान के लिए तकनीकी टीम कार्य कर रही है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि विभाग को कुल पंजीयनों के साथ-साथ श्रेणीवार आंकड़े भी सार्वजनिक करने चाहिए। उनका मानना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने पंजीयन वास्तविक संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े हैं और कितने अन्य दस्तावेजों के हैं, जिससे व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता आएगी।














