भोपाल, 11 जून।
भोपाल के आयुष सभागार में आरोग्य भारती द्वारा आयोजित राष्ट्रीय होम्योपैथी कार्यशाला ‘अमृतम्’ का सफल आयोजन किया गया। एक दिवसीय इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए 500 से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी और प्राध्यापकों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान होम्योपैथी, शोध, लोक स्वास्थ्य और एकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था में इसकी भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम का उद्घाटन मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
मंत्री ने कहा कि आरोग्य भारती विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों को एक मंच पर लाकर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार आयुष की सभी चिकित्सा पद्धतियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने कहा कि होम्योपैथी लगातार शोध आधारित चिकित्सा प्रणाली के रूप में विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय इस क्षेत्र में गुणवत्ता और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाओं पर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि संगठन देश के लगभग 92 प्रतिशत जिलों में स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। उन्होंने रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत चिकित्सा पद्धति को समय की आवश्यकता बताया।
मध्य प्रदेश शासन के अवर सचिव डॉ. संजय मिश्रा ने आयुष क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार इन चिकित्सा प्रणालियों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश के कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. शिशिर सिंह ने बच्चों के विकास में होम्योपैथी की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि एस.बी. डंगायच ने लोक स्वास्थ्य में इसके योगदान को रेखांकित किया। डॉ. रजत चट्टोपाध्याय ने एकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था में होम्योपैथी की उपयोगिता पर अपने विचार रखे।
इसके अलावा डॉ. गिरीश गुप्ता ने शोध आधारित होम्योपैथी की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं डॉ. बी.एस. जौहरी ने गर्भ संस्कार में होम्योपैथी की भूमिका पर चर्चा की। डॉ. शिवांग स्वामिनारायण और डॉ. भास्कर भट्ट ने होम्योपैथी के भविष्य, चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
दिनभर चले इस आयोजन में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच संवाद, शोध प्रस्तुतियां और अनुभव साझा किए गए। आयोजन के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के बीच समन्वय और सहयोग को लगातार मजबूत किया जाना आवश्यक है।
आयोजकों के अनुसार ‘अमृतम्’ कार्यशाला ने होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अनुसंधान को प्रोत्साहन देने और एकीकृत स्वास्थ्य व्यवस्था की अवधारणा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।















