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नेपाल
19 Jun, 2026

नेपाल में प्रशासनिक सुधार के नाम पर 18 हजार सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी की तैयारी

नेपाल सरकार एक नए अध्यादेश के माध्यम से करीब 18 हजार अनुभवी सरकारी कर्मचारियों को समय से पहले अनिवार्य अवकाश देने की बड़ी तैयारी में है जिससे राजकोष पर 25 अरब का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

काठमांडू, 19 जून।

नेपाल की सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत करीब 18 हजार पुराने और अनुभवी सरकारी कर्मियों को वक्त से पहले सेवानिवृत्त किया जा सकता है। एक विशेष अध्यादेश के जरिए चपरासी से लेकर सचिव स्तर तक के कर्मचारियों को एक साथ सेवामुक्त करने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह नया नियम जमीन पर उतरा, तो वर्तमान में काम कर रहे केवल 18 से 20 सचिव ही अपने पदों पर सुरक्षित बचेंगे।

वर्तमान आंकड़ों को देखें तो 55 साल की उम्र पार कर चुके सचिवों की संख्या 32 है। इसके अलावा 30 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले सचिवों का आंकड़ा 20 पहुंच चुका है। इस नए सेवा नियम से जो विशिष्ट श्रेणी के अधिकारी अप्रभावित रहेंगे, उनकी संख्या महज 18 है। इनमें मुख्य रूप से चंद्रकला पौडेल, मदन भुजेल, मुकुंद प्रसाद निरौला, रामेश्वर दंगाल और डॉ. दीपक काफ्ले शामिल हैं। इनके साथ ही राधिका अर्याल, लक्ष्मीकुमारी बस्नेत, नारायण प्रसाद शर्मा दुवाडी और सरिता दवाडी भी अपने पदों पर बनी रहेंगी।

इस फेरबदल का असर सहसचिव स्तर पर भी बड़े पैमाने पर दिखेगा। करीब 180 अनुभवी सहसचिव 55 वर्ष की आयु के कारण पद छोड़ेंगे, जबकि 30 साल की नौकरी पूरी होने से 88 राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी के अधिकारी बाहर हो जाएंगे। इन दोनों नियमों के लागू होने के बाद सिर्फ 75 सहसचिव ही सेवा में शेष बचेंगे। उपसचिव स्तर पर भी स्थिति ऐसी ही है, जहां उम्र के कारण 501 और सेवा अवधि की वजह से 259 कर्मचारी हटेंगे, जिससे केवल 180 अधिकारी ही बच पाएंगे।

प्रशासनिक स्तर पर शाखा अधिकृत श्रेणी के 2154 कर्मी इस नीति की चपेट में आएंगे। साथ ही 30 वर्ष की नौकरी के आधार पर राजपत्रांकित तृतीय श्रेणी के 1947 कर्मियों को घर भेजा जाएगा। इस वर्ग में 1060 कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। निचले पायदान पर राजपत्र अनंकित श्रेणी के 2154 कर्मी अपनी उम्र और 1947 कर्मचारी अपनी लंबी सेवा के कारण सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इस वर्ग के भी 1060 कर्मियों की नौकरी सुरक्षित रहेगी।

कुल लेखा-जोखा देखा जाए तो खरिदार से मुख्य सचिव स्तर तक आयु सीमा से 3637 और कार्य अवधि से 2801 कर्मी बाहर होंगे। सहायक से लेकर अधिकृत 12वें स्तर तक 4135 कर्मी उम्र और 3304 कर्मी सेवा अवधि के कारण प्रभावित हो रहे हैं। मोटे तौर पर 7439 कर्मचारियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, वहीं अलग-अलग श्रेणियों को मिलाकर करीब 6438 कर्मियों के जाने का अनुमान लगाया गया है।

प्रशासनिक सुधार की यह योजना आगामी जुलाई के अंत से लागू करने की तैयारी है। इसके तहत पहले वित्तीय वर्ष में वास्तविक सेवानिवृत्ति आयु 59 वर्ष और दूसरे वर्ष में 60 वर्ष तय की जाएगी। हालांकि वित्त मंत्रालय ने भारी वित्तीय संकट का हवाला देकर इस पर आपत्ति जताई है। इसके बावजूद संघीय मामिला मंत्री प्रतिभा रावल और कानून मंत्री सोविता गौतम के भारी दबाव के चलते इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर लगभग 25 अरब रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने की आशंका है।

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