Naidunia Live
• टॉप न्यूज़ • मध्य प्रदेश • विज्ञान व प्रौद्योगिकी • अपराध • शिक्षा • संपादकीय • धर्म / अध्यात्म • वीडियो स्टोरी • मौसम • त्योहार • प्रेरक कहानियाँ
• वीडियो • न्यूज़ आर्काइव

संपादकीय
22 Jun, 2026

एल्गोरिदम न्यूट्रल नहीं, वह एंगेजमेंट का भूखा है: डिजिटल चौपाल का कोई चौकीदार नहीं

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के बढ़ते प्रभाव के बीच एल्गोरिदम की भूमिका, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।

वाशिंगटन, 22 जून।

सोशल मीडिया आज केवल संवाद का माध्यम नहीं रहा, बल्कि वह एक ऐसी डिजिटल चौपाल बन चुका है जहां विचार फैलते हैं, अफवाहें उड़ती हैं, आंदोलन जन्म लेते हैं और कई बार जिंदगियां भी खत्म हो जाती हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस विशाल डिजिटल चौपाल का कोई चौकीदार नहीं है। मेटा, टिकटॉक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसी कंपनियां स्वयं को केवल टेक प्लेटफॉर्म बताकर जिम्मेदारी से बच निकलती हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वे किसी भी पारंपरिक प्रकाशक से कहीं अधिक प्रभावशाली नैरेटिव नियंत्रक बन चुकी हैं। 18 वर्षीय युवती की मौत के बाद उसके माता-पिता द्वारा मेटा और टिकटॉक पर दायर मुकदमे ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी।

यह घटना बताती है कि जब एल्गोरिदम संवेदनशीलता खो देता है तो वह घातक बन सकता है। आरोप है कि युवती ने अवसाद से जुड़ी सामग्री देखनी शुरू की तो प्लेटफॉर्म ने उसे लगातार उसी तरह के वीडियो और पोस्ट दिखाने शुरू कर दिए। एंगेजमेंट बढ़ाने की होड़ में एल्गोरिदम ने मानसिक संकट को और गहरा कर दिया। यह कोई अकेली घटना नहीं है। दुनिया भर में साइबर बुलिंग, फेक न्यूज और खतरनाक ऑनलाइन चैलेंज से जुड़ी अनेक मौतें दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद कंपनियों का तर्क यही रहता है कि वे केवल प्लेटफॉर्म हैं और कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं।

यह दलील अब स्वीकार्य नहीं रह गई है। सोशल मीडिया कंपनियां स्वयं को इंटरमीडियरी बताती हैं, लेकिन उनका एल्गोरिदम यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किसे और कितनी बार दिखाया जाएगा। डाकिया चिट्ठी पहुंचाता है, लेकिन वह यह तय नहीं करता कि कौन-सी चिट्ठी पहले पहुंचे। यहां एल्गोरिदम यही काम करता है। वह गुस्सा, डर, सनसनी और नफरत पैदा करने वाली सामग्री को अधिक लोगों तक पहुंचाता है क्योंकि उससे एंगेजमेंट और विज्ञापन की कमाई बढ़ती है। इसलिए यह कहना कि प्लेटफॉर्म पूरी तरह न्यूट्रल हैं, वास्तविकता से परे है।

भारत में 50 करोड़ से अधिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं। इस विशाल डिजिटल आबादी के साथ अवसर भी आए हैं और गंभीर खतरे भी। फेक न्यूज से हिंसा, डीपफेक से ब्लैकमेलिंग और खतरनाक ऑनलाइन चुनौतियों से मौत जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। आईटी नियम, 2021 में शिकायत अधिकारी और आपत्तिजनक सामग्री हटाने का प्रावधान तो है, लेकिन प्रभावी दंड और जवाबदेही का अभाव अब भी बना हुआ है। परिवारों को अक्सर लगता है कि उनका बच्चा मोबाइल पर पढ़ाई कर रहा है, जबकि वह मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री के जाल में फंस चुका होता है।

दुनिया के कई देशों ने अब आत्मनियमन पर भरोसा छोड़ दिया है। ब्रिटेन के ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट और यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट में प्लेटफॉर्म से एल्गोरिदम की पारदर्शिता, जोखिम मूल्यांकन और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है। अमेरिका के कई राज्यों में भी सोशल मीडिया कंपनियों पर मुकदमे चल रहे हैं कि उनके प्लेटफॉर्म को लत लगाने वाले तरीके से डिजाइन किया गया है। भारत में प्रस्तावित डिजिटल इंडिया एक्ट से भी ऐसी ही उम्मीदें हैं, लेकिन उसके लागू होने तक और कितनी घटनाएं सामने आएंगी, यह चिंता का विषय है।

सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही प्रतिबंध से नहीं, बल्कि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व से तय होनी चाहिए। एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली सार्वजनिक हो, बच्चों के लिए सुरक्षित मोड डिफॉल्ट बनाया जाए, आत्महत्या और आत्म-क्षति से जुड़े कंटेंट पर तत्काल रोक लगे, शिकायतों का त्वरित निपटारा हो और गंभीर मामलों में आर्थिक दायित्व भी तय किया जाए। साथ ही स्वतंत्र संस्थाओं से एल्गोरिदम का नियमित सामाजिक प्रभाव आकलन कराया जाना चाहिए।

अभिभावकों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है, लेकिन जब पूरा डिजिटल तंत्र उपयोगकर्ता का ध्यान अधिक से अधिक समय तक बांधे रखने के लिए बनाया गया हो, तब अकेला परिवार इस चुनौती से नहीं लड़ सकता। सोशल मीडिया का व्यवसाय मॉडल ही उपयोगकर्ता का ध्यान खींचकर विज्ञापन से अधिक कमाई करने पर आधारित है। इसलिए कानून और नैतिक नियमन दोनों का हस्तक्षेप आवश्यक है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का आधार है, लेकिन उसका अर्थ अराजकता नहीं हो सकता। सोशल मीडिया ने दुनिया को जोड़ा है, पर कई परिवारों को भी तोड़ा है। यदि ये कंपनियां डिजिटल सार्वजनिक मंच संचालित कर रही हैं तो उनकी जिम्मेदारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। 50 करोड़ भारतीय उपयोगकर्ता केवल डेटा नहीं, बल्कि नागरिक हैं। यदि प्लेटफॉर्म सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करेंगे तो अदालतें और समाज उनसे जवाब मांगेंगे। तब लाइक और व्यूज नहीं, बल्कि खोई हुई जिंदगियों का हिसाब देना होगा।

|
आज का राशिफल

मन प्रसन्न बना रहेगा। अचल संपत्ति की खरीद अथवा कृषि उद्यम में रुचि पैदा होगी। परिवार के साथ मनोरांजनिक स्थल की यात्रा होगी। आपसी प्रेम-भाव में बढ़ोतरी होगी। भविष्य की योजनाओं पर विचार विमर्श होगा। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। सभी का सहयोग मिलेगा। शुभांक-1-3-5

आज का मौसम

भोपाल

26° / 33°

Partly sunny

ट्रेंडिंग न्यूज़