Naidunia Live
• टॉप न्यूज़ • मध्य प्रदेश • विज्ञान व प्रौद्योगिकी • अपराध • शिक्षा • संपादकीय • धर्म / अध्यात्म • वीडियो स्टोरी • मौसम • त्योहार • प्रेरक कहानियाँ
• वीडियो • न्यूज़ आर्काइव

संपादकीय
23 Jun, 2026

मेरिट बनाम पूंजी: कांचना जैसी बेटियां चौथे पायदान पर क्यों फिसल जाती हैं

नीट पीजी काउंसलिंग के आंकड़े बताते हैं कि चिकित्सा शिक्षा में मेरिट हासिल करने के बाद भी आर्थिक चुनौतियां अनेक प्रतिभाशाली छात्रों के लिए प्रवेश की राह कठिन बना रही हैं।

नई दिल्ली, 23 जून।

नीट पीजी काउंसलिंग 2026 के आंकड़े भारतीय चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर वास्तविकता को उजागर करते हैं। 958 अभ्यर्थियों में से केवल 104 का चयन हुआ। यह संख्या केवल प्रतिस्पर्धा की कठिनाई नहीं बताती, बल्कि उस खाई की ओर भी संकेत करती है जो मेरिट और आर्थिक सामर्थ्य के बीच मौजूद है। आज केवल मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं रह गया है। प्रवेश की अंतिम मंजिल तक पहुंचने के लिए आर्थिक संसाधनों का होना भी उतना ही आवश्यक होता जा रहा है।

कांचना जैसी अनेक प्रतिभाशाली छात्राएं और छात्र इस व्यवस्था की सबसे बड़ी पीड़ित हैं। एक बस कंडक्टर के बेटे या रेलवे कुली की बेटी के लिए चिकित्सा शिक्षा तक पहुंचने का रास्ता केवल कठिन नहीं, बल्कि कई बार लगभग असंभव हो जाता है। कठोर परिश्रम और उत्कृष्ट रैंक हासिल करने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया के दौरान फीस, ऋण, बॉन्ड और अन्य आर्थिक बाधाएं उनके सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती हैं। चयन और वास्तविक प्रवेश के बीच का यह अंतर आज शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों ने महंगी कोचिंग और विशेष मार्गदर्शन का लाभ लिया है। दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र सीमित संसाधनों और ऑनलाइन सामग्री के सहारे तैयारी करते हैं। प्रतिस्पर्धा की शुरुआत भले समान परीक्षा से होती हो, लेकिन तैयारी के साधन और अवसर समान नहीं होते। यही असमानता आगे चलकर काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया में और स्पष्ट दिखाई देती है।

राज्यवार आंकड़े भी शिक्षा और आर्थिक विषमता का संकेत देते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली अभ्यर्थी चयनित होते हैं, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीमित संख्या और निजी संस्थानों की ऊंची फीस कई परिवारों के लिए गंभीर समस्या बन जाती है। परिणामस्वरूप अनेक छात्र चयनित होने के बावजूद प्रवेश नहीं ले पाते, जबकि आर्थिक रूप से सक्षम अभ्यर्थी उपलब्ध सीटों पर प्रवेश प्राप्त कर लेते हैं।

कोचिंग उद्योग का बढ़ता प्रभाव भी इस असंतुलन को गहरा कर रहा है। आज केवल परीक्षा की तैयारी ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग रणनीति और कॉलेज चयन जैसी सेवाएं भी एक बड़े बाजार का रूप ले चुकी हैं। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार इन सुविधाओं का लाभ उठा लेते हैं, जबकि कमजोर वर्ग के छात्र सूचना और मार्गदर्शन के अभाव में अवसर खो देते हैं। इससे योग्यता और अवसर के बीच की दूरी बढ़ती जाती है।

बॉन्ड नीति और फीस संरचना भी कई बार आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए चुनौती बन जाती है। ग्रामीण सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई व्यवस्थाओं का प्रभाव सभी वर्गों पर समान नहीं पड़ता। दूसरी ओर अनेक संस्थानों में वास्तविक खर्च की पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं होती, जिससे अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है।

स्थिति में सुधार के लिए कुछ ठोस कदम आवश्यक हैं। सभी मेडिकल कॉलेजों को अपनी संपूर्ण फीस संरचना, हॉस्टल शुल्क, बॉन्ड राशि और अन्य व्ययों का विवरण काउंसलिंग शुरू होने से पहले सार्वजनिक करना चाहिए। चयनित आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए आसान और न्यूनतम ब्याज दर वाले शिक्षा ऋण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। छात्रवृत्ति और फीस सहायता योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जाना आवश्यक है।

काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और रियल टाइम सूचना आधारित बनाया जाना चाहिए। रिक्त सीटों और उनके आवंटन से संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध होने से अभ्यर्थियों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त सामाजिक संस्थाओं, पूर्व छात्रों और स्वयंसेवी संगठनों को भी प्रतिभाशाली लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

यह केवल किसी एक छात्र या परिवार का प्रश्न नहीं है। हर वर्ष हजारों प्रतिभाशाली अभ्यर्थी आर्थिक कारणों से चिकित्सा शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। यह न केवल व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी नुकसान है। विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों से आने वाले छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद समाज की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रतिभा की पहचान करना नहीं, बल्कि उसे अवसर उपलब्ध कराना भी होना चाहिए। यदि मेरिट आर्थिक बाधाओं के सामने हारने लगे तो यह किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए चिंता का विषय है। आवश्यकता इस बात की है कि चयन और प्रवेश के बीच की दूरी कम की जाए तथा ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिसमें किसी भी प्रतिभाशाली छात्र का भविष्य उसकी आर्थिक स्थिति से निर्धारित न हो। कांचना जैसी बेटियों का संघर्ष हमें यही संदेश देता है कि प्रतिभा देश के हर घर में जन्म लेती है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरे समाज और व्यवस्था की है।

|
आज का राशिफल

मन प्रसन्न बना रहेगा। अचल संपत्ति की खरीद अथवा कृषि उद्यम में रुचि पैदा होगी। परिवार के साथ मनोरांजनिक स्थल की यात्रा होगी। आपसी प्रेम-भाव में बढ़ोतरी होगी। भविष्य की योजनाओं पर विचार विमर्श होगा। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। सभी का सहयोग मिलेगा। शुभांक-1-3-5

आज का मौसम

भोपाल

26° / 33°

Partly sunny

ट्रेंडिंग न्यूज़