नई दिल्ली, 13 जुलाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए नीतिशास्त्र के एक महत्वपूर्ण श्लोक को साझा किया है। उन्होंने इस सुभाषितम् के माध्यम से एक सशक्त और उन्नत भारत के निर्माण में जन-भागीदारी और जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर श्लोक का उल्लेख करते हुए बताया कि महिलाओं का कल्याण सुनिश्चित करना और युवा पीढ़ी की रक्षा करना राष्ट्र का प्राथमिक दायित्व है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश की एकता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए निरंतर आवश्यक व्यवस्था करना ही जन प्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य है।
इस प्रेरक विचार को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब चौतरफा विकास के साथ हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है, तभी देश की प्रगति नई ऊंचाइयों को छूती है। इसी भावना को आधार बनाकर सरकार भारत की दृढ़ता को निरंतर आगे बढ़ा रही है।















