वैश्विक, 13 जुलाई।
मोबाइल और लैपटॉप आज हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन यही तकनीक धीरे-धीरे शरीर की बनावट भी बदल रही है। विशेषज्ञ इसे 'फोन बॉडी' कह रहे हैं। लगातार स्क्रीन देखने की आदत का असर अब बच्चों से लेकर युवाओं तक साफ दिखाई दे रहा है।
फोन को नीचे रखकर देखने पर गर्दन पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है। सामान्य स्थिति में सिर का वजन लगभग पांच किलो होता है, लेकिन गर्दन झुकने पर यह दबाव 27 किलो तक पहुंच सकता है। लंबे समय तक इसी मुद्रा में रहने से 'टेक नेक' की समस्या, रीढ़ पर दबाव, गर्दन और कंधों में दर्द जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। 15 से 30 वर्ष के युवाओं में इन शिकायतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
आंखों पर भी इसका असर पड़ रहा है। शोध बताते हैं कि मोबाइल स्क्रीन से अधिक नुकसान बाहर कम समय बिताने के कारण हो रहा है। प्राकृतिक रोशनी की कमी से मायोपिया यानी नजदीक की नजर कमजोर होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं लगातार टाइपिंग और स्क्रॉलिंग से हाथों की मांसपेशियां भी कमजोर हो रही हैं। स्क्रीन टाइम बढ़ने से नींद प्रभावित होती है, एकाग्रता घटती है और तनाव व चिड़चिड़ापन बढ़ता है।
बचाव के उपाय
इस समस्या से बचने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाने जरूरी हैं:
-
20-20-20 नियम: हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
-
सही मुद्रा: फोन को आंखों की ऊंचाई पर रखें।
-
शारीरिक सक्रियता: रोज कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
-
प्राकृतिक समय: बच्चों को प्रतिदिन दो घंटे खुली जगह में समय बिताने दें।
-
जागरूकता: स्कूलों में डिजिटल हाइजीन की शिक्षा और नियमित स्क्रीन ब्रेक अनिवार्य किए जाने चाहिए।
तकनीक सुविधा का साधन है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग ही शरीर और भविष्य दोनों को स्वस्थ रख सकता है।














