भोपाल, 13 जुलाई।
मध्य प्रदेश में पशुपालकों की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने अपने महत्वाकांक्षी दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के तीसरे चरण का आगाज सोमवार से कर दिया है। इस पहल के तहत विभागीय अमला सीधे पशुपालकों के द्वार तक पहुंचेगा, ताकि उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से रूबरू कराया जा सके। अभियान में मुख्य रूप से तीन से चार पशु पालने वाले छोटे और मध्यम श्रेणी के किसानों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने स्पष्ट किया कि इस चरण में प्रशिक्षित कर्मचारी पशुपालकों को नस्ल सुधार, संतुलित पशु पोषण, समयबद्ध टीकाकरण और सेक्स सॉर्टेड सीमेन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाएंगे। यह अभियान फिलहाल छह दिनों के लिए निर्धारित है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाकर नौ दिन किया जा सकता है। मैदानी स्तर पर आने वाली चुनौतियों के तुरंत निस्तारण के लिए एक समर्पित कंट्रोल रूम भी संचालित किया जाएगा, जिसकी निगरानी वरिष्ठ नोडल अधिकारी करेंगे।
इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए इसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी अहम बनाया गया है। प्रदेश के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को इस कार्यक्रम से जोड़कर इसकी व्यापकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, विभाग के प्रत्येक अधिकारी को अपने क्षेत्र के कम से कम 10 गांवों का मूल्यांकन और पांच प्रतिशत पशुपालकों का सत्यापन करना अनिवार्य होगा। संपूर्ण कार्यक्रम की निगरानी जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पंचायत के स्तर पर की जाएगी, ताकि पशुपालन के क्षेत्र में राज्य की प्रगति को गति मिल सके।















