बांकुड़ा, 13 जुलाई।
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले की ऐतिहासिक हाटग्राम शंख कला को अब वैश्विक पहचान मिल गई है। लगभग 300 साल पुरानी इस अनूठी धरोहर को आधिकारिक रूप से जीआई मान्यता प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के बाद स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों में खुशी की लहर है।
हाटग्राम शंख वणिक कल्याण समिति ने साल 2022 में इस दिशा में प्रयास शुरू किए थे, जो अब सफल रहे हैं। इंदपुर विकासखंड का हाटग्राम इस शिल्प का मुख्य केंद्र है। हालांकि, बांकुड़ा नगर के अलावा विष्णुपुर और रायबाघिनी जैसे क्षेत्रों में भी पीढ़ियों से इस कला को संजोया जा रहा है।

यहां के कारीगर मुख्य रूप से दक्षिण भारत से कच्चा माल मंगाते हैं। पहले छेनी-हथौड़ी से होने वाली नक्काशी अब आधुनिक मशीनों के साथ मिलकर और अधिक बारीक हो गई है। यहाँ के कलाकार शंखों पर रामायण, महाभारत और सामाजिक संदेशों को खूबसूरती से उकेरते हैं।

करीब 300 परिवार इस पारंपरिक व्यवसाय से सीधे जुड़े हैं। अब कलाकार पारंपरिक चूड़ियों के साथ-साथ गृह सज्जा की आधुनिक वस्तुएं भी बना रहे हैं। त्रि-आयामी जालीदार नक्काशी की नई तकनीक ने उत्पादों का आकर्षण और बढ़ा दिया है।
एक बेहतरीन कलाकृति तैयार करने में तीन महीने तक का समय लग सकता है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित बाबलू नंदी का मानना है कि यह मान्यता कलाकारों की बरसों की मेहनत का सम्मान है। कारीगरों को उम्मीद है कि इससे उन्हें कानूनी सुरक्षा और बेहतर आर्थिक अवसर प्राप्त होंगे।















