श्रीनगर, 14 जुलाई।
जम्मू-कश्मीर में नशा मुक्ति केंद्रों के संचालन को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब ड्रग डी-एडिक्शन रजिस्ट्री पोर्टल (डीडीआरपी) पर पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए [Aadhaar Redacted] ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य नशा मुक्ति सेवाओं के दुरुपयोग को रोकना और पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना है।
नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर के अंतर्गत संचालित यह पोर्टल मरीजों के उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास का संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है। इसके माध्यम से ही मरीजों को दी जाने वाली नियंत्रित दवाओं की आपूर्ति को नियमित किया जाता है। प्रशासन का मानना है कि अब आधार आधारित सत्यापन से डुप्लिकेट पंजीकरण की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी और वास्तविक लाभार्थियों तक ही सरकार समर्थित सुविधाएं पहुंच सकेंगी।
हालांकि, उन मरीजों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है जिनके पास अभी [Aadhaar Redacted] उपलब्ध नहीं है। ऐसे लोग एनरोलमेंट की प्रक्रिया के माध्यम से अपना इलाज जारी रख सकेंगे। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी जरूरतमंद मरीज को आधार के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रखा जाएगा। विभाग का लक्ष्य इस प्रणाली को दुरुस्त कर नशा मुक्ति कार्यक्रमों की कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।














