भोपाल, 14 जुलाई।
मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की चाल थोड़ी सुस्त पड़ गई है। जुलाई के मध्य तक प्रदेश में हुई औसत बारिश का आंकड़ा अब सामान्य स्तर से नीचे लुढ़क गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 241.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य 250.1 मिमी के मुकाबले 3 प्रतिशत कम है। यद्यपि अब तक कुल कोटे की 25 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, लेकिन पिछले पांच दिनों से बादलों की लुकाछिपी ने जनमानस की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग में औसत से 17 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल जैसे पश्चिमी अंचलों में भी सामान्य से 10 प्रतिशत कम पानी बरसा है। राज्य के आधे से अधिक जिलों में बारिश की कमी साफ देखी जा सकती है क्योंकि बादल तो उमड़ रहे हैं, मगर वे झमाझम बरसने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
आज के मौसम के पूर्वानुमान की बात करें तो सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, उमरिया और मंडला समेत कुछ चुनिंदा जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की फुहारें गिर सकती हैं। इसके विपरीत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित अधिकांश बड़े शहरों में तेज धूप निकलने के आसार हैं, जिससे उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।
मानसून के इस कमजोर होने के पीछे प्रमुख मौसमी प्रणालियों का निष्प्रभावी होना बताया जा रहा है। हालांकि, राहत की उम्मीदें अभी कायम हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवाती सिस्टम विकसित हो रहा है। यदि यह प्रभावी होता है, तो प्रदेश में एक बार फिर जोरदार बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है।
जून के मुकाबले जुलाई का पहला पखवाड़ा शुरुआती दिनों में तो बेहतर रहा, लेकिन पिछले कुछ दिनों की खामोशी ने आंकड़ों को पीछे धकेल दिया है। प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें कुल मानसूनी कोटे की 40 प्रतिशत वर्षा इसी दौरान होती है। अब सबकी निगाहें आने वाले मौसमी तंत्रों पर टिकी हैं, जो मानसून को फिर से सक्रिय कर सकते हैं।















