एडिनबर्ग, 14 जुलाई।
आईसीसी ने अपनी वार्षिक बैठक में अफगान शरणार्थी महिला क्रिकेटरों को बड़ी सौगात दी है। परिषद ने उनके लिए चल रहे डेवलपमेंट पाथवे प्रोग्राम को जारी रखने के साथ ही एक विशेष टास्कफोर्स का गठन किया है। इस समिति का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030 तक इन महिला खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की मुख्यधारा और क्वालिफिकेशन प्रणाली में शामिल करने का रोडमैप तैयार करना है।
इस महत्वपूर्ण टास्कफोर्स में डॉ. रोज रिवाज और सारा कीन को शामिल किया गया है। वे बीसीसीआई, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया तथा ईसीबी के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम की बारीकी से निगरानी करेंगी। डॉ. रोज रिवाज के अनुसार, यह पहल खिलाड़ियों के लिए कोचिंग, प्रतिस्पर्धी मुकाबलों और उच्च प्रदर्शन का एक सुदृढ़ ढांचा तैयार करेगी, जिससे उनके खेल में निखार आएगा।
अफगान क्रिकेटर नाहिदा सपन ने इस समर्थन के लिए आभार जताते हुए कहा कि इससे उन्हें अन्य देशों की खिलाड़ियों के बराबर अवसर मिलने की आस जगी है। वहीं, फिरोजा अफगान ने भारत और इंग्लैंड के पिछले दौरों को अपने करियर का यादगार पल बताया। उनका कहना है कि बेहतर कोचिंग और 2030 के लक्ष्य ने उन्हें अपने खेल को और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया है।
क्रिकेट विशेषज्ञ मेल जोन्स ने इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे इन महिला खिलाड़ियों के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर करार दिया है। आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण, फिजियोथेरेपी और अन्य तकनीकी सुविधाएं उनके निवास स्थानों पर ही मिलती रहेंगी।
भविष्य में टीम को एक साथ प्रशिक्षण लेने और अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के व्यापक अवसर प्रदान किए जाएंगे। इस चरणबद्ध योजना का उद्देश्य इन महिला खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारकर उन्हें विश्व स्तर पर स्थापित करना है, ताकि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवा सकें।















